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Nutan Birthday Special: इन 5 यादगार किरदारों ने नूतन को दिलाए फिल्मफेयर पुरस्कार

नूतन (Nutan) की पांच यादगार फिल्में

नई दिल्ली :

मशहूर दिवंगत अदाकारा नूतन (Nutan) किसी परिचय की मोहताज नहीं. नूतन का जन्म 4 जून 1936 में हुआ था. नूतन ने अपने संजीदा और सशक्त अभिनय के दम पर सिनेमा की दुनिया पर गहरी छाप छोड़ी. नूतन ने अपने करिअर की शुरुआत बतौर चाइल्ड एक्ट्रेस फिल्म ‘नल दमयंती’ से की. उन्होंने ‘मिस इंडिया’ में हिस्सा लिया और जीता. इस टाइटल को पाने वालीं वे पहली एक्ट्रेस थीं. घर में फिल्मी माहौल रहने के कारण नूतन का रुझान भी फिल्मों की ओर हो गया. वुमन सेंट्रिक रोल वाली फिल्में उनकी पहचान बनीं. 70 से ज्यादा फिल्में करने वाली नूतन की सादगी के लोग दीवाने थे. फिल्मों में नूतन की चॉइस अपने जमाने की एक्ट्रेसेज से जुदा थी. नूतन (Nutan) के करियर की सर्वश्रेष्ठ पांच फिल्में, इन सभी फिल्मों के लिए उन्हें फिल्मफेयर के बेस्ट एक्ट्रेस के अवॉर्ड से नवाजा गया था.

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सीमा (1955)

‘सीमा’ में नूतन (Nutan) ने बलराज साहनी के साथ अनाथ की भूमिका निभाई, जो अपने रिश्तेदारों के हाथों पीड़ित है और फिर चोरी का आरोप लगने के बाद उसे एक अनाथालय भेज दिया जाता है. यहां पहली बार उसे दोस्ती, करुणा और प्यार मिलता है. इस फिल्म का निर्देशन अमिय चक्रबर्ती ने किया था.

सुजाता (1959)

बिमल रॉय के निर्देशन में बनी इस फिल्म में सुनील दत्त और नूतन (Nutan) मुख्य भूमिका में थे और यह सुबोध घोष की इसी नाम की एक बंगाली लघु कहानी पर आधारित थी. इस फिल्म में भारत की जाति व्यवस्था को दर्शाया गया है. इस फिल्म को 1960 में भारत तरफ से कान फिल्म फेस्टिवल में भेजा गया था. ये फिल्म एक ब्राह्मण युवक अधीर (सुनील दत्त) और एक अछूत महिला सुजाता (नूतन) के बीच रोमांस की कहानी है.

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बंदिनी (1963)

इस फिल्म में नूतन के साथ धर्मेंद्र और अशोक कुमार मुख्य भूमिका में थे. फिल्म जरासंध (चारु चंद्र चक्रवर्ती) के बंगाली उपन्यास ‘तामसी’ पर आधारित है. ये फिल्म हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रही एक महिला कैदी की कहानी है. जिसे देवेंद्र (धर्मेंद्र), प्यार करने वाले जेल डॉक्टर और बिकाश (अशोक कुमार), अपने अतीत के एक पुरुष के बीच किसी एक को चुनना है. ‘बंदिनी’ नूतन के अभिनय का सर्वोच्च शिखर है. बंदिनी में नूतन के अभिनय को भारतीय सिनेमा की सार्वकालिक सर्वश्रेष्ठ भूमिकाओं में गिना जाता है.

मिलन (1967)

अदुर्थी सुब्बा राव द्वारा निर्देशित ‘मिलन’, उनकी हिट तेलुगू फिल्म ‘मोगा मानसुलु (1963)’ का रीमेक थी. फिल्म में गोपी (सुनील दत्त), राधा (नूतन) से प्यार करता है, लेकिन दोनों की कहानी अधूरी रह जाती है. लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के संगीत और आनंद बख्शी के गीतों के साथ, फिल्म में सभी प्रमुख कलाकारों द्वारा शानदार अभिनय किया गया था.

मैं तुलसी तेरे आँगन की (1978)

ये फिल्म चंद्रकांत काकोडकर के ‘आशी तुझी प्रीत’ नाम के मराठी उपन्यास पर आधारित है. ये फिल्म एक कुलीन ठाकुर राजनाथ सिंह चौहान (विजय आनंद) के बारे में है, जो तुलसी (आशा पारेख) से प्यार करता है,  लेकिन उसे संजुक्ता (नूतन) नाम की महिला से शादी के लिए मजबूर किया जाता है.

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