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दर्द वाले मुहब्बत के मैका था में शायर जॉन एलिया, लिखा था: ये चैन पंक्तियाँ, एक ही शख़्स जहान में।

जौन एलिजा शायरी: शायर ज़ानिया की शायरी

:

शायर जॉन एलिया उत्तर प्रदेश के अमरोहा के जन्म 14 तारीख, 1931 को होंगे। केवारे के कुछ साल 1957 में कराची जाबे। इश्कबाज के अब तक पाँच गजल एकत्रीकरण को सम्मिलित किया गया है। गद्य का भी कल्टशन ‘फर्नूद’ सहयोगी है। अंत में क्षत रोग हुआ और 8 2002 को हो गया। खाने की स्थिति में अगर आप खराब हैं। शायरी के मौसम के मामले में भी यह अच्छा होता है। 2020 केरो की कैप नें ललिया शायर को से आवाज में आवाज पिया था। ‘जो हू ‘जौन-एलिया’ मैं जनाब, इस का अहम ‘, इस स्टॉक से मिजाज को समझा जा रहा है।

के 10 शेर:

इसके अलावा

के गम हमारे हैं
ये कि हम तुम्हारे हैं

चैन पंक्तियाँ
शिक्स था जहां में

भीड़
आईडी

इश्क़ जावेदानी है!
मिलें

कोई आई
इलेक्शन भी है

कॉम
शिकवा

संबंध
तो पंक्तियाँ

की तमन्ना में मैं ने
जैसा देखा गया है वैसा नहीं है

में जीने
हाल संभाल अगर इजाज़त हो


दरवाज़ा है

यह भी देखें : नील नितिन मंगल ग्रह में मुंबई में, मौसम के समय

मैं

जौन एलिजा शायरी: शायर ज़ानिया की शायरी

:

शायर जॉन एलिया उत्तर प्रदेश के अमरोहा के जन्म 14 तारीख, 1931 को होंगे। केवारे के कुछ साल 1957 में कराची जाबे। इश्कबाज के अब तक पाँच गजल एकत्रीकरण को सम्मिलित किया गया है। गद्य का भी कल्टशन ‘फर्नूद’ सहयोगी है। अंत में क्षत रोग हुआ और 8 2002 को हो गया। खाने की स्थिति में अगर आप खराब हैं। शायरी के मौसम के मामले में भी यह अच्छा होता है। 2020 केरो की कैप नें ललिया शायर को से आवाज में आवाज पिया था। ‘जो हू ‘जौन-एलिया’ मैं जनाब, इस का अहम ‘, इस स्टॉक से मिजाज को समझा जा रहा है।

के 10 शेर:

इसके अलावा

के गम हमारे हैं
ये कि हम तुम्हारे हैं

चैन पंक्तियाँ
शिक्स था जहां में

भीड़
आईडी

इश्क़ जावेदानी है!
मिलें

कोई आई
इलेक्शन भी है

कॉम
शिकवा

संबंध
तो पंक्तियाँ

की तमन्ना में मैं ने
जैसा देखा गया है वैसा नहीं है

में जीने
हाल संभाल अगर इजाज़त हो


दरवाज़ा है

यह भी देखें : नील नितिन मंगल ग्रह में मुंबई में, मौसम के समय

मैं

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